छत्तीसगढ़
राष्ट्रीय बागवानी मिशन ने बदली कृषक दशरथ पटेल की आर्थिक तस्वीर
Shantanu Roy
24 Dec 2025 11:42 PM IST

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Mahasamund. महासमुंद। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखण्ड के ग्राम कसहीबाहरा निवासी कृषक दशरथ पटेल ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना से लाभान्वित होकर अपनी खेती की दिशा बदलकर प्रेरणादायक सफलता हासिल की है। 47 वर्षीय पटेल, जो 12वीं तक शिक्षित हैं, पूर्व में परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे। उनकी भूमि रेतीली होने के कारण धान की खेती में लागत अधिक थी, जबकि उत्पादन कम होने के कारण आय सीमित रहती थी।
आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पटेल ने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत अनुदान प्राप्त कर करेले की खेती अपनाई। उन्होंने 0.60 हेक्टेयर भूमि पर ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करते हुए यह फसल शुरू की। धान की खेती के दौरान लगभग 21 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसे 31 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय किया जाता था। इसमें लागत अधिक होने के कारण कुल आय सीमित रह जाती थी। वहीं, करेले की खेती से लगभग 100 क्विंटल उत्पादन हुआ, जिसे औसतन 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय किया गया। परिणामस्वरूप पटेल की कुल आय लगभग 2 लाख रुपये रही, जबकि खर्च अपेक्षाकृत कम था। इससे उन्हें धान की तुलना में लगभग चार गुना अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
करेले की खेती के कारण दशरथ पटेल की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और वे अपनी खेती से संतुष्ट होकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस सफलता ने ग्राम कसहीबाहरा और आसपास के क्षेत्रों के अन्य कृषकों को उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। पटेल ने बताया कि करेले की खेती से न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि भूमि की उपजाऊ क्षमता और कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करने से छोटे कृषक भी अच्छी कमाई कर सकते हैं।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारी भी पटेल की इस सफलता को प्रेरणादायक उदाहरण मानते हैं और अन्य किसानों को इसी तरह की सब्जी और फल उगाने की सलाह दे रहे हैं। अधिकारी बताते हैं कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और सीमित भूमि वाले कृषकों को उच्च लाभ वाली फसल उगाने के लिए प्रेरित करना है। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह की सफलताएँ अन्य किसानों को नई कृषि तकनीकों और उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित कर रही हैं। पटेल की कहानी साबित करती है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक खेती तकनीकों का संयोजन किसान की आर्थिक स्थिति सुधारने और जीवनस्तर बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी हो सकता है।
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